बेसबब हम अश्क बहाए जाते है
दिल के रिश्ते जो आजमाए जाते है
गम जिंदगी के फिर रुलाये जाते है
शमा के साथ परवाना भी जलता है
साथ क्या यूँ निभाए जाते है
टूट कर बिखरे अरमानो की तरह
बेसबब हम अश्क बहाए जाते है
बुझती ही नहीं इश्क की आग यारा
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है
दिल रोता ही रहा तेरी बेवफाई पर
हम उल्फत में जख्म खाए जाते है
संगदिल है वो मगर रोयेगा जरूर
दर्द मेरे उसको भी तडपाये जाते है
उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ
मेरे जख्मो के जो मिल जाते निशां
तन्हा होती मै न जिंदगी होती वीरां
उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ तुम गर तोड़ दोगे यूँ आईने मेरे
इन टूटी तस्वीरों को मै देदुंगी जुबाँ कल रात तेरी याद में रोते ही रहे
संग रोने लगी ये सावन की घटा ऐसी राहों से भी हम गुजरे है जहा
गमों की धूप थी सर पे था खुला आसमां आपने ही एहसासों के हाथो हुई जख्मी
मुझको तुमसे तो ना था कोई शिकवा इन सूनी उदास रातो के दर्द से
कौन जाने हम कब होजाये फ़ना ना उमीदी को करो न खुद पे सवार
अभी खुशबु ए जिंदगी है और है नया समां
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है
दिल के रिश्ते जो आजमाए जाते है
गम जिंदगी के फिर रुलाये जाते है
साथ क्या यूँ निभाए जाते है टूट कर बिखरे अरमानो की तरह
बेसबब हम अश्क बहाए जाते है बुझती ही नहीं इश्क की आग यारा
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है दिल रोता ही रहा तेरी बेवफाई पर
हम उल्फत में जख्म खाए जाते है संगदिल है वो मगर रोयेगा जरूर
दर्द मेरे उसको भी तडपाये जाते है
कितने चुपचाप से लगते है शजर शाम के बाद
उसने देखा न कभी एक नजर शाम के बाद
कितने चुपचाप से लगते है शजर शाम के बाद
देखना चाँद के दर्पण में मुझे शाम के बाद इतने चुप की रास्ते को भी नहीं याद होगा
छोड देगे किसी रोज ये नगर शाम के बाद शाम से पहले मस्त परिंदे अपनी उड़ानों में
छुप जाते है इन धोसलो में वो शाम के बाद तुमने सूरज कभी देखा नहीं इस रात का दर्द
कितने बेरंग से लगते हैं शहर शाम के बाद लौट के आएगा वो जरूर किसी रोज ‘अनु’
आस पर खोल के रखते है दर शाम के बाद
मैंने जो खाई कसमे उसे निभाती चली गई
जो वादे किये थे तुमने उसे भुला दिया
मैंने जो खाई कसमे उसे निभाती चली गई
नहीं भूल पाई हूँ वो तेरे प्यार की गर्मी
वो नमी होठो की सांसो को महकती चली गई
चाहती तो तोड़ देती रस्मो की जंजीरों को
पर प्रीत की डोर में खुद को उलझती चली गई
अब क्या मै तुझसे वफाओ का जिक्र करू
मै दीवानी हो खुद को ही आजमाती चली गई
तुझसे बिछड कर मै भी जी ना पाऊँगी
पर हवाए मुझे हुक्मे जुदाई सुनती चली गई
दर्दे दिल न था चाहत की कली खिली न थी
दर्दे दिल न था चाहत की कली खिली न थी
वो भी क्या दिन थे जब तुझसे मिली न थी
ये क्या हुआ मुझको पहले तो ऐसी न थी लगता है की वो भी शर्मसार है खुद से
उसकी जफ़ा मेरी वफा से गहरी न थी वक्त ही रहा होगा मेरा दुश्मने तकदीर
वरना किसी की बदुआ में वो तासीर न थी एक तुमको ही न बना सके अपना
और तो जिंदगी में कोई कमी न थी
बेरुखी सरे बज्म यूँ सह ना सकेगा दिल
बिन आपके तन्हा था तन्हा रहेगा दिल
माज़ी की वादियों में भटका करेगा दिल
फिर आपके बिन दुनिया कितनी है अधूरी
ऊमीदों के साये में धडका करेगा दिल
ख़ामोशी की जंजीरें लगा ली है लबों पे
अब गुफ्तगू की खातिर तडपा करेगा दिल
है आप से मोहब्बत कितनी मुझे सनम
बेरुखी सरे बज्म यूँ सह ना सकेगा दिल
क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है
दर्द है दिल में और दिल परेशान है
बस यही दर्द अब मेरी पहचान है
हम तेरी आरजू में फना होगये
मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है
अपना जीना फकत एक एहसास है
जिस्म में जिंदगी जैसे मेहमान है
हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ
पर लबो की हँसी भी तो बेजान है
तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता
क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है
मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा
फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है
हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन
बस इक ताजी हवा का ही अरमान है
हर पल बिकता यहाँ ईमान है
कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है
(अनु -12/6/2010)
हम भी किस्मत का लिक्खा बदल डालते
तुम जो अपना नजरिया बदल डालतेहम भी किस्मत का लिक्खा बदल डालते साथ चलने को तेरे दिल राजी न होता
हम साथ चलने का फैसला बदल डालते मौसमों की तुझे खबर भी ना मिलती
खौफ से घुटन के हम हवा बदल डालते तुझ सा आता हमे जीने का गर हुनर
पता अपने मकां का हम बदल डालते जिंदगी अपनी आसान हो जाती गर
हम जो हमारा मसला बदल डालते
(9/2/2010-अनु)
वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह
फिजां भी लगती है तन्हा उदास मेरी तरह
क्या इसे भी है किसी की तलाश मेरी तरह
वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह खुद को रखा है सब्ज आंसुओ की बारिश से
यूँ तो आता है हिज्र किसे रास मेरी तरह रोज आती है सरे शाम हिचकियाँ किस को
याद आता है किसे कोई खास मेरी तरह फुरकत-ए-इश्क ने दुनिया उजाड़ दी जिसकी
आज भी टूटी नहीं उसकी आस मेरी तरह ज़िक्रे मज्लूम न पहुंची दरे इंसाफी तक
हिम्मते कशमकश रही न काश मेरी तरह

